Saturday, 19 November 2011

the real story

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पश्चमी उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर नगर में दो दोस्तों की दोस्ती लेन-देन को लेकर अचानक दुश्मनी में बदल गई। दुश्मनी भी छोटी-मोटी नहीं बल्कि ऐसी की जिसके चलते हुए एक दशक से भी ज्यादा का समय बीत चुका है। ये दोनों दोस्त आगे चलकर दो गैंगों के नाम से जाने, जाने लगे, जिनका पश्चिम यूपी में खासा नाम है। यही नहीं ये दुश्मनी आगे चलकर गैंगवार में तब्दील हो गई, जिसमें अभी तक दोनों ओर से कई की जिंदगियां खत्म हो चुकी हैं लेकिन गैंगवार है कि थमने का नाम नहीं ले रही है। लगभग सालों से सोई इस गैंगवार ने बीती रात दोबारा नया रूप ले लिया। दोनों गैंगों के बीच बीती रात अंधाधुंध गोलीबारी हुई। जिसमें अभी तक पांच लोगों की मरने की ख़बर मिल चुकी है। दोबारा पनपी इस दुश्मनी से पूरा गाजियाबाद खौफज़दा है। आइए अब आपको बताते हैं कि कभी एक दूसरे जिगरी दोस्त होने वाले कैसे एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए? सूत्रों के अनुसार सुंदर भाटी निवासी घंघोला, गौतमबुद्धनगर और नरेश भाटी निवासी रिठौरी गौतमबुद्धनगर का रहने वाला था, इन दोनों की मां सगी बहनें थी। एक समय था जब ये दोनों एक दूसरे पर जान न्योछावर किया करते थे। इसके बाद सुंदर भाटी व नरेश भाटी ने सिकंदराबाद बस स्टॉप पर ट्रक यूनियन बनाई और दोनों वहां से गुजरने वालों ट्रकों से अवैध उगाही करने लगे। इसका कुछ हिस्सा पुलिस को भी जाता था। दोनों का ये उगाही का कारोबार बहुत अच्छा चलने लगा, रोजाना हजारों रुपयों की इनकम होने लगी।



इसके बाद सुंदर भाटी ने नरेश भाटी को गौतमबुद्धनगर का पहला जिला पंचायत अध्यक्ष व चेयरमैन बनवाया था। नरेश भाटी ने भी सुंदर भाटी की पत्नी सुनीता भाटी को दनकौर से ब्लॉक प्रमुख जितवाने में मदद की।

कैसे हुई दोनों में दुश्मनी
सूत्रों की माने तो सिकंदराबाद में ट्रकों से उगाही के अवैध ठेके को लेकर दोनों में कई बार मामूली कहासुनी हो चुकी थी। सुंदर चाहता था कि ये ठेका उसे मिलना चाहिए लेकिन नरेश भी ठेके को छोड़ने को तैयार नहीं था। इसी को लेकर ये मामूली रंजिश नफरत में बदलती चली गई और फिर एक दिन दोनों में गोलियां तक चल गई। बस गैंगवार की नींव यहीं से धरी गई थी। सुंदर भाटी और नरेश भाटी के रास्ते अब अलग-अगल हो चुके थे। दोनों किसी भी कीमत पर उस ठेके को पाने की कोशिश में जुट गए। एक दिन मेरठ से आते समय सुंदर भाटी के गुर्गों ने नरेश भाटी पर जान से मारने की नीयत से गोलियों से हमला कर दिया। इस हमले में नरेश भाटी तो बच गया लेकिन उसका एक साथी मारा गया। इसके बाद नरेश भाटी ने सुंदर भाटी से बदला लेने का मन बना लिया और अपने गुर्गे उसके पीछे लगा दिए। इन गुर्गों ने सुंदर भाटी के भाई पटवारी को मार डाला। जिसके बाद दोनों एक दूसरे के कट्टर दुश्मन हो चुके थे। उस समय सपा के एक विधायक ने दोनों का खेलरी स्टेशन के पास समझौता भी करवाया था, लेकिन बात नहीं बनी। दोनों के सिर पर एक दूसरे से बदला लेना का जुनून सवार था। इस दौरान एक बार नरेश भाटी क्षेत्र के ही ड़ाढा गांव में किसी की तेरहवीं में शामिल होने गया था। इसके बाद वहां से वापस लौटते हुए उसी के गैंग के किसी सदस्य ने उसकी मुखबरी कर दी। बस फिर क्या था मुखबरी के आधार पर सुंदर भाटी के गुर्गों ने घंघौला चौकी से कुछ ही दूरी पर पुलिया के पास उसकी गाड़ियां रोक कर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जिसमें नरेश भाटी मारा गया। इसके बाद नरेश के छोटे भाई रणपाल ने सुंदर भाटी को मारने की कसम खाई और जुर्म की दुनिया में उतर गया लेकिन रणपाल को बुलंदशहर पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया। इस एनकाउंटर के पीछे भी सुंदर भाटी का हाथ होने की बात सामने आई थी।



इसी तरह से दोनों ओर से अब तक दर्जनों जाने जा चुकी हैं लेकिन अंजाम कुछ भी नहीं हुआ। कई सालों से बंद पड़ी इस गैंगवार ने बीती रात फिर से पैर पसार लिए। जिसका जीता जागता उदहारण गाजियाबाद के साहिबाबाद थाना क्षेत्र में देखने को मिला। यहां नरेश भाटी के भांजे अमित कसाना ने अपने मामा के हत्यारे को उसके अंजाम तक पहुंचाने के लिए सुंदर भाटी पर हमला कर दिया। जिसमें चार लोगों की जान जा चुकी है और कई घायल हैं।

वहीं दशकों से चली आ रही इस गैंगवार में पुलिस ने कभी नहीं चाहा की ये गैंगवार खत्म हो। पुलिस भी अपने फायदे के लिए दोनों गैंगों को इस्तेमाल करती रही। शायद इसी का नतीजा है कि एक दशक पुरानी इस दुश्मनी की भेंट बीती रात चार और जिंदिगियां चढ़ गयीं।

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