Friday, 23 September 2011

Seema Parihar is a former woman bandit and a member of Indian political party






Seema Parihar is a former woman bandit and a member of Indian political party, Samajwadi Party. She faces charges on 29 counts of murder and kidnapping and is hoping to be elected to represent a district in the state of Uttar Pradesh for India's Lok Sabha, or lower house of Parliament.[1]
Inspiration: Seema Parihar claims that her inspiration is The former Bandit Queen Phoolan Devi. Phoolan Devi also became a member of parliament in 1996 after a long career of Bandit and was later murdered in Delhi by an upper caste Hindu while still serving as an MP in 2001. "I want to carry forward the legacy of Phoolan Devi," Ms Parihar told the BBC

Sunday, 18 September 2011

अब पटना में भी दौड़ेगी मोनो और मेट्रो रेल

पटना।। बिहार की राजधानी पटना के भी लोग अब मेट्रो रेल की सवारी कर सकेंगे। योजना आयोग ने पटना में मेट्रो रेल परियोजना के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

राज्य के नगर विकास मंत्री प्रेम कुमार ने शुक्रवार को बताया कि योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया के सलाहकार गजेन्द्र हल्दिया, सलाहकार रवि मित्तल और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई एक बैठक में इस पर सहमति बनी। योजना आयोग ने पटना में मेट्रो रेल परियोजना के लिए रिपोर्ट तैयार कराने का निर्णय लिया है।

उन्होंने बताया कि आयोग के निर्देश के बाद विभाग एक महीने के अंदर 'रिक्वेस्ट ऑफ क्वॉलिफिकेसन' (आरओक्यू) के तहत निविदा आमंत्रित करेगा। यह निविदा उन कंपनियों के चयन के लिए होगा, जो रिपोर्ट तैयार करेंगी।

उन्होंने बताया कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत बनने वाली इस मेट्रो रेल परियोजना के लिए छह माह के अंदर व्यावहार्यता रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी।



बिहार की राजधानी पटना में अब जल्द ही मोनोरेल और मेट्रो रेल की सीटी सुनाई देगी। योजना आयोग की तरफ से पटना में मेट्रो रेल की दो लाइनों को मंजूरी मिल गई है। दूसरी तरफ, मोनो रेल के बारे में भी रेलवे की ओर से राज्य सरकार को आखिरी प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, 'हमारी कोशिश पटना को एक विश्व स्तरीय शहर बनाने की है। इसीलिए हम शहर में यातायात की सुविधाअें में इजाफा कर रहे हैं। इसके लिए मेट्रो रेल के साथ-साथ मोनो रेल के मामले में भी हम काफी गंभीर हैं। इस बाबत योजना आयोग की हमें मंजूरी मिल गई है। दूसरी तरफ, मोनो रेल के मामले में भी हम लगातार रेलवे के साथ संपर्क में हैं।' इस अधिकारी ने बताया कि, 'इस वक्त योजना आयोग की तरफ से मेट्रो रेल की दो लाइन को मंजूरी मिल गई है। इसका निर्माण निजी-सार्वजनिक भागीदारी (पीपीपी) आधार पर किया जाएगा, जिस पर करीब 8,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस बारे में हमें निर्माण एजेंसियों का चयन करना है, जिसके लिए निविदाएं जल्दी ही आमंत्रित की जाएंगी। वैसे, हमें उम्मीद है कि पटना में मेट्रो रेल आने में कम से कम 5-6 साल का वक्त लग सकता है।' सूत्रों के मुताबिक इस परियोजना के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को सलाहकार नियुक्त किया गया है।
नगर विकास मंत्री प्रेम कुमार ने बताया कि, 'पटना की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए हम यातायात की सुविधाओं में इजाफा कर रहे हैं। मेट्रो रेल की हमें मंजूरी मिल गई है। इस बारे में जल्द ही काम भी शुरू कर दिया जाएगा। इसमें 20 फीसदी खर्च केंद्र सरकार देगी, जबकि 20 फीसदी पैसे हमें लगाना है। बाकी का निवेश निजी भागीदार को करना है।' योजना आयोग ने पटना जंक्शन-दीघा और सचिवालय-बेली रोड रूट पर मेट्रो रेल के विकास की बात कही है।
दूसरी तरफ, मोनो रेल के मामले में भी राज्य सरकार काफी गंभीर है। इस बारे में रेलवे की ओर से आखिरी प्रस्ताव राज्य सरकार को सौंपा जा चुका है। राज्य सरकार के सूत्रों ने बताया कि, 'हम उन जगहों पर इस सेवा को शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं, जहां मेट्रो नहीं जा सकती। मिसाल के तौर पर पटना सिटी का इलाका काफी सघन है। यहां कदम-कदम पर ऐतिहासिक इमारतें हैं और रास्ते काफी संकरे हैं। ऐसे में वहां खुदाई करना मुमकिन नहीं है।'
अपने प्रस्ताव में रेलवे ने 4 रूट (पटना जंक्शन-पटना सिटी, गांधी मैदान-बस अड्डा, पटना जंक्शन-दानापुर और हाईकोर्ट-कुर्जी) पर मोनो रेल की सेवा शुरू करने की सिफारिश की है।

Thursday, 15 September 2011

खुशखबरीः अब रोमिंग पर नहीं लगेगा कोई चार्ज!





देश के भीतर ट्रैवल करते वक्त मोबाइल सेवाओं के इस्तेमाल पर लगने वाली रोमिंग फीस जल्द ही छूमंतर हो जाएगी। इससे ज्यादा यात्रा करने वाले मोबाइल उपभोक्ताओं का मासिक बिल घट जाएगा। लेकिन, दूरसंचार कंपनियों की आमदनी पर इसका असर पड़ेगा।

टेलिकॉम पॉलिसी 2011 के ड्राफ्ट में मोबाइल फोन कंपनियों के लिए 'एक देश-एक लाइसेंस' की व्यवस्था और रोमिंग चार्ज खत्म करने का प्रस्ताव किया गया है। यह पॉलिसी एक दशक पुरानी मौजूदा टेलिकॉम पॉलिसी की जगह लेगी। इन प्रस्तावों को कितने वक्त में अमली जामा पहनाया जाएगा, इस बारे में ड्राफ्ट पॉलिसी में कुछ भी नहीं कहा गया है।

ज्यादातर मुल्कों में घरेलू रोमिंग चार्ज की व्यवस्था नहीं है। इसमें अमेरिका जैसे बड़े देश शामिल हैं, जहां मोबाइल ऑपरेटरों के लिए सिंगल टेलिकॉम परमिट का नियम है। भारत को 22 टेलिकॉम सर्कल में बांटा गया है और जब कभी ग्राहक अपने सर्कल से बाहर जाते हैं, तो उन्हें अपना फोन इस्तेमाल करने के लिए फीस चुकानी होती है। साल के अंत तक नई पॉलिसी से परदा हटाया जा सकता है। इस पॉलिसी में मोबाइल नम्बर पोर्टैबिलिटी (एमएनपी) का दायरा बढ़ाकर ग्राहकों को बिना रोमिंग शुल्क चुकाए नए शहर या देश की किसी नई लोकेशन पर जाने पर पुराना मोबाइल नम्बर बनाए रखने की सहूलियत देने का प्रस्ताव भी किया गया है।

फिलहाल ऑपरेटर बदलने पर ग्राहकों को पुराना मोबाइल नम्बर बरकरार रखने की सुविधा देने वाले एमएनपी को सर्किल तक सीमित रखा गया है। मसलन, दिल्ली का कोई ग्राहक महानगर के भीतर दूसरे ऑपरेटर की सेवाएं ले सकता है, क्योंकि उसके नम्बर के लिए इसे ही बेस सर्कल के रूप में देखा जाता है। लेकिन अगर यही मोबाइल नम्बर मुंबई में इस्तेमाल होता है, तो उसे रोमिंग शुल्क अदा करना होगा। नई पॉलिसी मोबाइल यूजर को अपने नम्बर के लिए होम बेस बदलने की सुविधा देगा और यह अगले साल से प्रभावी होगी।

इन प्रस्तावों, खास तौर से रोमिंग शुल्क खत्म करने से जुड़े प्रस्ताव को दूरसंचार कंपनियों का विरोध झेलना पड़ सकता है। इसका कारण है कि रोमिंग से इन ऑपरेटरों को 13,000-14,000 करोड़ रुपए या कुल आमदनी का 10 फीसदी हिस्सा हासिल होता है। मौजूदा नियमों के मुताबिक मोबाइल फोन कंपनी अपने होम नेटवर्क से बाहर ट्रैवल करने वाले मोबाइल यूजर से लोकल कॉल के लिए अधिकतम 1.40 रुपए प्रति मिनट चार्ज वसूल सकती है। रोमिंग पर आउटगोइंग एसटीडी कॉल के लिए यह लिमिट 2.40 रुपए प्रति मिनट और सभी इनकमिंग एसटीडी कॉल के लिए 1.75 रुपए प्रति मिनट रखी गई है, भले ही दूरी कितनी भी क्यों न हो।

लेकिन मौजूदा दरें साल 2007 में ट्राई की ओर से लगाई गई इन सीमाओं से काफी नीचे हैं, क्योंकि दो साल पहले सेक्टर में छिड़ी टैरिफ की जंग ने ऑपरेटरों को रोमिंग दरें घटाने पर भी मजबूर कर दिया था। टेलिकॉम विभाग के अधिकारी के मुताबिक नए लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क और सभी मोबाइल फोन कंपनियों के सिंगल परमिट की ओर से माइग्रेशन में काफी वक्त लग सकता है। माइग्रेशन प्रक्रिया की जटिलता इस बात से भी बढ़ सकती है कि मोबाइल फोन कंपनियों के परमिट अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग वक्त पर एक्सपायर होते हैं।

ग्राहक केंद्रित उपायों के अलावा ड्राफ्ट पॉलिसी में टेलिकॉम सेक्टर के लिए कई लक्ष्य भी तय किए गए हैं। मसलन, 2017 तक देश में 17.5 करोड़ और 2020 तक 60 करोड़ ब्रॉडबैंड यूजर होने चाहिए। साथ ही इस अवधि में ग्रामीण टेलिडेंसिटी बढ़कर 60 फीसदी तक पहुंचनी चाहिए। यह भी कहा गया है कि 2017 तक उद्योग के लिए 300 मेगाहर्ट्ज अतिरिक्त एयरवेव का इंतजाम होना चाहिए, जो 2020 तक 200 मेगाहर्ट्ज तक पहुंचे।

खुशखबरीः अब रोमिंग पर नहीं लगेगा कोई चार्ज!




आपको बता दें कि अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में मोबाइल ऑपरेटरों के लिए ‘सिंगल परमिट लाइसेंस’ की व्यवस्था है। यानी एक ही परमिट पर वे देशभर में टेलीकॉम सेवाएं दे सकते हैं। जबकी भारत को 22 अलग अलग टेलीकॉम सर्किलों में बांटा गया है। और मोबाइल कंपनियों को सभी सर्किलों के लिए अलग अलग लाइसेंस लेना पड़ता है। ऐसे में मोबाइल ग्राहक भी जब अलग अलग सर्किलों में जाते हैं तो उनसे इसके लिए चार्ज वसूला जाता है।


लेकिन नई टेलीकॉम पॉलिसी के प्रस्तावों से इस समस्या से निजात मिल सकती है। माना जा रहा है कि इस साल के अंत तक इन प्रस्तावों को पेश कर दिया जाएगा। और अगर इन्हे लागू कर दिया जाता है तो मोबाइल इस्तेमाल करने वाले लोगों को इससे काफी फायदा होगा।
देश के भीतर ट्रैवल करते वक्त मोबाइल सेवाओं के इस्तेमाल 
वाली रोमिंग फीस जल्द ही छूमंतर हो जाएगी। इससे ज्यादा यात्रा करने वाले मोबाइल उपभोक्ताओं का मासिक बिल घट जाएगा। लेकिन, दूरसंचार कंपनियों की आमदनी पर इसका असर पड़ेगा।

टेलिकॉम पॉलिसी 2011 के ड्राफ्ट में मोबाइल फोन कंपनियों के लिए 'एक देश-एक लाइसेंस' की व्यवस्था और रोमिंग चार्ज खत्म करने का प्रस्ताव किया गया है। यह पॉलिसी एक दशक पुरानी मौजूदा टेलिकॉम पॉलिसी की जगह लेगी। इन प्रस्तावों को कितने वक्त में अमली जामा पहनाया जाएगा, इस बारे में ड्राफ्ट पॉलिसी में कुछ भी नहीं कहा गया है।

ज्यादातर मुल्कों में घरेलू रोमिंग चार्ज की व्यवस्था नहीं है। इसमें अमेरिका जैसे बड़े देश शामिल हैं, जहां मोबाइल ऑपरेटरों के लिए सिंगल टेलिकॉम परमिट का नियम है। भारत को 22 टेलिकॉम सर्कल में बांटा गया है और जब कभी ग्राहक अपने सर्कल से बाहर जाते हैं, तो उन्हें अपना फोन इस्तेमाल करने के लिए फीस चुकानी होती है। साल के अंत तक नई पॉलिसी से परदा हटाया जा सकता है। इस पॉलिसी में मोबाइल नम्बर पोर्टैबिलिटी (एमएनपी) का दायरा बढ़ाकर ग्राहकों को बिना रोमिंग शुल्क चुकाए नए शहर या देश की किसी नई लोकेशन पर जाने पर पुराना मोबाइल नम्बर बनाए रखने की सहूलियत देने का प्रस्ताव भी किया गया है।

फिलहाल ऑपरेटर बदलने पर ग्राहकों को पुराना मोबाइल नम्बर बरकरार रखने की सुविधा देने वाले एमएनपी को सर्किल तक सीमित रखा गया है। मसलन, दिल्ली का कोई ग्राहक महानगर के भीतर दूसरे ऑपरेटर की सेवाएं ले सकता है, क्योंकि उसके नम्बर के लिए इसे ही बेस सर्कल के रूप में देखा जाता है। लेकिन अगर यही मोबाइल नम्बर मुंबई में इस्तेमाल होता है, तो उसे रोमिंग शुल्क अदा करना होगा। नई पॉलिसी मोबाइल यूजर को अपने नम्बर के लिए होम बेस बदलने की सुविधा देगा और यह अगले साल से प्रभावी होगी।

इन प्रस्तावों, खास तौर से रोमिंग शुल्क खत्म करने से जुड़े प्रस्ताव को दूरसंचार कंपनियों का विरोध झेलना पड़ सकता है। इसका कारण है कि रोमिंग से इन ऑपरेटरों को 13,000-14,000 करोड़ रुपए या कुल आमदनी का 10 फीसदी हिस्सा हासिल होता है। मौजूदा नियमों के मुताबिक मोबाइल फोन कंपनी अपने होम नेटवर्क से बाहर ट्रैवल करने वाले मोबाइल यूजर से लोकल कॉल के लिए अधिकतम 1.40 रुपए प्रति मिनट चार्ज वसूल सकती है। रोमिंग पर आउटगोइंग एसटीडी कॉल के लिए यह लिमिट 2.40 रुपए प्रति मिनट और सभी इनकमिंग एसटीडी कॉल के लिए 1.75 रुपए प्रति मिनट रखी गई है, भले ही दूरी कितनी भी क्यों न हो।

लेकिन मौजूदा दरें साल 2007 में ट्राई की ओर से लगाई गई इन सीमाओं से काफी नीचे हैं, क्योंकि दो साल पहले सेक्टर में छिड़ी टैरिफ की जंग ने ऑपरेटरों को रोमिंग दरें घटाने पर भी मजबूर कर दिया था। टेलिकॉम विभाग के अधिकारी के मुताबिक नए लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क और सभी मोबाइल फोन कंपनियों के सिंगल परमिट की ओर से माइग्रेशन में काफी वक्त लग सकता है। माइग्रेशन प्रक्रिया की जटिलता इस बात से भी बढ़ सकती है कि मोबाइल फोन कंपनियों के परमिट अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग वक्त पर एक्सपायर होते हैं।

ग्राहक केंद्रित उपायों के अलावा ड्राफ्ट पॉलिसी में टेलिकॉम सेक्टर के लिए कई लक्ष्य भी तय किए गए हैं। मसलन, 2017 तक देश में 17.5 करोड़ और 2020 तक 60 करोड़ ब्रॉडबैंड यूजर होने चाहिए। साथ ही इस अवधि में ग्रामीण टेलिडेंसिटी बढ़कर 60 फीसदी तक पहुंचनी चाहिए। यह भी कहा गया है कि 2017 तक उद्योग के लिए 300 मेगाहर्ट्ज अतिरिक्त एयरवेव का इंतजाम होना चाहिए, जो 2020 तक 200 मेगाहर्ट्ज तक पहुंचे।