Thursday, 15 September 2011

खुशखबरीः अब रोमिंग पर नहीं लगेगा कोई चार्ज!




आपको बता दें कि अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में मोबाइल ऑपरेटरों के लिए ‘सिंगल परमिट लाइसेंस’ की व्यवस्था है। यानी एक ही परमिट पर वे देशभर में टेलीकॉम सेवाएं दे सकते हैं। जबकी भारत को 22 अलग अलग टेलीकॉम सर्किलों में बांटा गया है। और मोबाइल कंपनियों को सभी सर्किलों के लिए अलग अलग लाइसेंस लेना पड़ता है। ऐसे में मोबाइल ग्राहक भी जब अलग अलग सर्किलों में जाते हैं तो उनसे इसके लिए चार्ज वसूला जाता है।


लेकिन नई टेलीकॉम पॉलिसी के प्रस्तावों से इस समस्या से निजात मिल सकती है। माना जा रहा है कि इस साल के अंत तक इन प्रस्तावों को पेश कर दिया जाएगा। और अगर इन्हे लागू कर दिया जाता है तो मोबाइल इस्तेमाल करने वाले लोगों को इससे काफी फायदा होगा।
देश के भीतर ट्रैवल करते वक्त मोबाइल सेवाओं के इस्तेमाल 
वाली रोमिंग फीस जल्द ही छूमंतर हो जाएगी। इससे ज्यादा यात्रा करने वाले मोबाइल उपभोक्ताओं का मासिक बिल घट जाएगा। लेकिन, दूरसंचार कंपनियों की आमदनी पर इसका असर पड़ेगा।

टेलिकॉम पॉलिसी 2011 के ड्राफ्ट में मोबाइल फोन कंपनियों के लिए 'एक देश-एक लाइसेंस' की व्यवस्था और रोमिंग चार्ज खत्म करने का प्रस्ताव किया गया है। यह पॉलिसी एक दशक पुरानी मौजूदा टेलिकॉम पॉलिसी की जगह लेगी। इन प्रस्तावों को कितने वक्त में अमली जामा पहनाया जाएगा, इस बारे में ड्राफ्ट पॉलिसी में कुछ भी नहीं कहा गया है।

ज्यादातर मुल्कों में घरेलू रोमिंग चार्ज की व्यवस्था नहीं है। इसमें अमेरिका जैसे बड़े देश शामिल हैं, जहां मोबाइल ऑपरेटरों के लिए सिंगल टेलिकॉम परमिट का नियम है। भारत को 22 टेलिकॉम सर्कल में बांटा गया है और जब कभी ग्राहक अपने सर्कल से बाहर जाते हैं, तो उन्हें अपना फोन इस्तेमाल करने के लिए फीस चुकानी होती है। साल के अंत तक नई पॉलिसी से परदा हटाया जा सकता है। इस पॉलिसी में मोबाइल नम्बर पोर्टैबिलिटी (एमएनपी) का दायरा बढ़ाकर ग्राहकों को बिना रोमिंग शुल्क चुकाए नए शहर या देश की किसी नई लोकेशन पर जाने पर पुराना मोबाइल नम्बर बनाए रखने की सहूलियत देने का प्रस्ताव भी किया गया है।

फिलहाल ऑपरेटर बदलने पर ग्राहकों को पुराना मोबाइल नम्बर बरकरार रखने की सुविधा देने वाले एमएनपी को सर्किल तक सीमित रखा गया है। मसलन, दिल्ली का कोई ग्राहक महानगर के भीतर दूसरे ऑपरेटर की सेवाएं ले सकता है, क्योंकि उसके नम्बर के लिए इसे ही बेस सर्कल के रूप में देखा जाता है। लेकिन अगर यही मोबाइल नम्बर मुंबई में इस्तेमाल होता है, तो उसे रोमिंग शुल्क अदा करना होगा। नई पॉलिसी मोबाइल यूजर को अपने नम्बर के लिए होम बेस बदलने की सुविधा देगा और यह अगले साल से प्रभावी होगी।

इन प्रस्तावों, खास तौर से रोमिंग शुल्क खत्म करने से जुड़े प्रस्ताव को दूरसंचार कंपनियों का विरोध झेलना पड़ सकता है। इसका कारण है कि रोमिंग से इन ऑपरेटरों को 13,000-14,000 करोड़ रुपए या कुल आमदनी का 10 फीसदी हिस्सा हासिल होता है। मौजूदा नियमों के मुताबिक मोबाइल फोन कंपनी अपने होम नेटवर्क से बाहर ट्रैवल करने वाले मोबाइल यूजर से लोकल कॉल के लिए अधिकतम 1.40 रुपए प्रति मिनट चार्ज वसूल सकती है। रोमिंग पर आउटगोइंग एसटीडी कॉल के लिए यह लिमिट 2.40 रुपए प्रति मिनट और सभी इनकमिंग एसटीडी कॉल के लिए 1.75 रुपए प्रति मिनट रखी गई है, भले ही दूरी कितनी भी क्यों न हो।

लेकिन मौजूदा दरें साल 2007 में ट्राई की ओर से लगाई गई इन सीमाओं से काफी नीचे हैं, क्योंकि दो साल पहले सेक्टर में छिड़ी टैरिफ की जंग ने ऑपरेटरों को रोमिंग दरें घटाने पर भी मजबूर कर दिया था। टेलिकॉम विभाग के अधिकारी के मुताबिक नए लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क और सभी मोबाइल फोन कंपनियों के सिंगल परमिट की ओर से माइग्रेशन में काफी वक्त लग सकता है। माइग्रेशन प्रक्रिया की जटिलता इस बात से भी बढ़ सकती है कि मोबाइल फोन कंपनियों के परमिट अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग वक्त पर एक्सपायर होते हैं।

ग्राहक केंद्रित उपायों के अलावा ड्राफ्ट पॉलिसी में टेलिकॉम सेक्टर के लिए कई लक्ष्य भी तय किए गए हैं। मसलन, 2017 तक देश में 17.5 करोड़ और 2020 तक 60 करोड़ ब्रॉडबैंड यूजर होने चाहिए। साथ ही इस अवधि में ग्रामीण टेलिडेंसिटी बढ़कर 60 फीसदी तक पहुंचनी चाहिए। यह भी कहा गया है कि 2017 तक उद्योग के लिए 300 मेगाहर्ट्ज अतिरिक्त एयरवेव का इंतजाम होना चाहिए, जो 2020 तक 200 मेगाहर्ट्ज तक पहुंचे।


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