पटना।। बिहार की राजधानी पटना के भी लोग अब मेट्रो रेल की सवारी कर सकेंगे। योजना आयोग ने पटना में मेट्रो रेल परियोजना के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
राज्य के नगर विकास मंत्री प्रेम कुमार ने शुक्रवार को बताया कि योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया के सलाहकार गजेन्द्र हल्दिया, सलाहकार रवि मित्तल और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई एक बैठक में इस पर सहमति बनी। योजना आयोग ने पटना में मेट्रो रेल परियोजना के लिए रिपोर्ट तैयार कराने का निर्णय लिया है।
उन्होंने बताया कि आयोग के निर्देश के बाद विभाग एक महीने के अंदर 'रिक्वेस्ट ऑफ क्वॉलिफिकेसन' (आरओक्यू) के तहत निविदा आमंत्रित करेगा। यह निविदा उन कंपनियों के चयन के लिए होगा, जो रिपोर्ट तैयार करेंगी।
उन्होंने बताया कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत बनने वाली इस मेट्रो रेल परियोजना के लिए छह माह के अंदर व्यावहार्यता रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी।
बिहार की राजधानी पटना में अब जल्द ही मोनोरेल और मेट्रो रेल की सीटी सुनाई देगी। योजना आयोग की तरफ से पटना में मेट्रो रेल की दो लाइनों को मंजूरी मिल गई है। दूसरी तरफ, मोनो रेल के बारे में भी रेलवे की ओर से राज्य सरकार को आखिरी प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, 'हमारी कोशिश पटना को एक विश्व स्तरीय शहर बनाने की है। इसीलिए हम शहर में यातायात की सुविधाअें में इजाफा कर रहे हैं। इसके लिए मेट्रो रेल के साथ-साथ मोनो रेल के मामले में भी हम काफी गंभीर हैं। इस बाबत योजना आयोग की हमें मंजूरी मिल गई है। दूसरी तरफ, मोनो रेल के मामले में भी हम लगातार रेलवे के साथ संपर्क में हैं।' इस अधिकारी ने बताया कि, 'इस वक्त योजना आयोग की तरफ से मेट्रो रेल की दो लाइन को मंजूरी मिल गई है। इसका निर्माण निजी-सार्वजनिक भागीदारी (पीपीपी) आधार पर किया जाएगा, जिस पर करीब 8,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस बारे में हमें निर्माण एजेंसियों का चयन करना है, जिसके लिए निविदाएं जल्दी ही आमंत्रित की जाएंगी। वैसे, हमें उम्मीद है कि पटना में मेट्रो रेल आने में कम से कम 5-6 साल का वक्त लग सकता है।' सूत्रों के मुताबिक इस परियोजना के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को सलाहकार नियुक्त किया गया है।
नगर विकास मंत्री प्रेम कुमार ने बताया कि, 'पटना की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए हम यातायात की सुविधाओं में इजाफा कर रहे हैं। मेट्रो रेल की हमें मंजूरी मिल गई है। इस बारे में जल्द ही काम भी शुरू कर दिया जाएगा। इसमें 20 फीसदी खर्च केंद्र सरकार देगी, जबकि 20 फीसदी पैसे हमें लगाना है। बाकी का निवेश निजी भागीदार को करना है।' योजना आयोग ने पटना जंक्शन-दीघा और सचिवालय-बेली रोड रूट पर मेट्रो रेल के विकास की बात कही है।
दूसरी तरफ, मोनो रेल के मामले में भी राज्य सरकार काफी गंभीर है। इस बारे में रेलवे की ओर से आखिरी प्रस्ताव राज्य सरकार को सौंपा जा चुका है। राज्य सरकार के सूत्रों ने बताया कि, 'हम उन जगहों पर इस सेवा को शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं, जहां मेट्रो नहीं जा सकती। मिसाल के तौर पर पटना सिटी का इलाका काफी सघन है। यहां कदम-कदम पर ऐतिहासिक इमारतें हैं और रास्ते काफी संकरे हैं। ऐसे में वहां खुदाई करना मुमकिन नहीं है।'
अपने प्रस्ताव में रेलवे ने 4 रूट (पटना जंक्शन-पटना सिटी, गांधी मैदान-बस अड्डा, पटना जंक्शन-दानापुर और हाईकोर्ट-कुर्जी) पर मोनो रेल की सेवा शुरू करने की सिफारिश की है।
राज्य के नगर विकास मंत्री प्रेम कुमार ने शुक्रवार को बताया कि योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया के सलाहकार गजेन्द्र हल्दिया, सलाहकार रवि मित्तल और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई एक बैठक में इस पर सहमति बनी। योजना आयोग ने पटना में मेट्रो रेल परियोजना के लिए रिपोर्ट तैयार कराने का निर्णय लिया है।
उन्होंने बताया कि आयोग के निर्देश के बाद विभाग एक महीने के अंदर 'रिक्वेस्ट ऑफ क्वॉलिफिकेसन' (आरओक्यू) के तहत निविदा आमंत्रित करेगा। यह निविदा उन कंपनियों के चयन के लिए होगा, जो रिपोर्ट तैयार करेंगी।
उन्होंने बताया कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत बनने वाली इस मेट्रो रेल परियोजना के लिए छह माह के अंदर व्यावहार्यता रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी।
बिहार की राजधानी पटना में अब जल्द ही मोनोरेल और मेट्रो रेल की सीटी सुनाई देगी। योजना आयोग की तरफ से पटना में मेट्रो रेल की दो लाइनों को मंजूरी मिल गई है। दूसरी तरफ, मोनो रेल के बारे में भी रेलवे की ओर से राज्य सरकार को आखिरी प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, 'हमारी कोशिश पटना को एक विश्व स्तरीय शहर बनाने की है। इसीलिए हम शहर में यातायात की सुविधाअें में इजाफा कर रहे हैं। इसके लिए मेट्रो रेल के साथ-साथ मोनो रेल के मामले में भी हम काफी गंभीर हैं। इस बाबत योजना आयोग की हमें मंजूरी मिल गई है। दूसरी तरफ, मोनो रेल के मामले में भी हम लगातार रेलवे के साथ संपर्क में हैं।' इस अधिकारी ने बताया कि, 'इस वक्त योजना आयोग की तरफ से मेट्रो रेल की दो लाइन को मंजूरी मिल गई है। इसका निर्माण निजी-सार्वजनिक भागीदारी (पीपीपी) आधार पर किया जाएगा, जिस पर करीब 8,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस बारे में हमें निर्माण एजेंसियों का चयन करना है, जिसके लिए निविदाएं जल्दी ही आमंत्रित की जाएंगी। वैसे, हमें उम्मीद है कि पटना में मेट्रो रेल आने में कम से कम 5-6 साल का वक्त लग सकता है।' सूत्रों के मुताबिक इस परियोजना के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को सलाहकार नियुक्त किया गया है।
नगर विकास मंत्री प्रेम कुमार ने बताया कि, 'पटना की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए हम यातायात की सुविधाओं में इजाफा कर रहे हैं। मेट्रो रेल की हमें मंजूरी मिल गई है। इस बारे में जल्द ही काम भी शुरू कर दिया जाएगा। इसमें 20 फीसदी खर्च केंद्र सरकार देगी, जबकि 20 फीसदी पैसे हमें लगाना है। बाकी का निवेश निजी भागीदार को करना है।' योजना आयोग ने पटना जंक्शन-दीघा और सचिवालय-बेली रोड रूट पर मेट्रो रेल के विकास की बात कही है।
दूसरी तरफ, मोनो रेल के मामले में भी राज्य सरकार काफी गंभीर है। इस बारे में रेलवे की ओर से आखिरी प्रस्ताव राज्य सरकार को सौंपा जा चुका है। राज्य सरकार के सूत्रों ने बताया कि, 'हम उन जगहों पर इस सेवा को शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं, जहां मेट्रो नहीं जा सकती। मिसाल के तौर पर पटना सिटी का इलाका काफी सघन है। यहां कदम-कदम पर ऐतिहासिक इमारतें हैं और रास्ते काफी संकरे हैं। ऐसे में वहां खुदाई करना मुमकिन नहीं है।'
अपने प्रस्ताव में रेलवे ने 4 रूट (पटना जंक्शन-पटना सिटी, गांधी मैदान-बस अड्डा, पटना जंक्शन-दानापुर और हाईकोर्ट-कुर्जी) पर मोनो रेल की सेवा शुरू करने की सिफारिश की है।
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